SC-ST एक्ट में नए बदलाव

9 months ago Newspadho 0

दलितों के सवर्णो के ऊपर बढ़ते अत्याचार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने SC ST में कुछ बदलाव किये है जिस से की आए दिन सवर्णो को झूठे केश में फसाये जाने के मामलो में कमी आ सके । आज कल सोशल मीडिया पर भी सवर्णो के खिलाफ जहर उगलने की एक परंपरा सी चल पड़ी है दलितों में जिसकी वजह से दलित अपने धर्म तक को अपमानित करने लगा है । SC ST एक्ट 1989 राजीव गाँधी की सरकार के द्वारा लाया गया था ।

राजीव गाँधी सरकार के जब यह बिल लाया गया तब यह कहा गया था की तमाम कोशिशों के बावजूद अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाति की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हो पाया है उनके खिलाफ भेद भाव जारी है ताकतवर लोग उन्हें दबा रहे है SC ST समुदाय इस से काफी ज्यादा पीड़ित है प्रभावशाली लोग उनको काफी अपमानित करते है ऐसे में मौजूद कानून उन्हें न्याय दिलाने के कमजोर साबित हो रहे है अब कुछ ऐसा होना चाहिए जिस से की अनुसूचित जाती और जनजाति सुरक्षित महसूस करे । भारतीय दंड संहिता उन्हें सुरक्षा देने में नाकाम रही है । हमें ऐसा कानून चाहिए जो उन्हें सुरक्षा दे सके.” इन दलीलों के साथ ये विधेयक पास किया गया और इसे नाम दिया गया अनुसूचित जाती और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 । संसद में पास होने के बाद इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिए जिसके बाद 30 जनवरी 1990 को यह जम्मू कश्मीर को छोड़कर यह सभी राज्यों में लागु किया गया । इसमें कुछ संसोधन अप्रैल 2016 में किये गए ।हालही में इसमें बड़ा बदलाव किया गया है ।

क्या है SC ST एक्ट ?

SC ST एक्ट हर उस व्यक्ति पर लागू होता है जो SC ST में नहीं आता है अगर कोई व्यक्ति SC ST का उत्पीड़न करता है तब यह अधिनियम आईपीसी धाराओं के साथ लागु होता है और उसके तहत उसपर कार्यवाही किया जाता है, इस कानून के तहत अलग अलग अपराध के लिए पीड़ित को 75000 से लेकर 8 लाख 50 हज़ार रूपये तक की सहायता दी जाती है । साथ ही ऐसे मामलो के लिए विशेष तरह की अदालते बनाई गयी है जिनमे तुरंत फैसला लिया जाता है । इस एक्ट के तहत महिलाओ पर किये गए अत्याचार में महिलाओ के मेडिकल जांच की सुविधा है । इस एक्ट के तहत दर्ज मामलो में पीड़ित अपना केश लड़ने के लिए सरकार से आर्थिक मदद भी ले सकता है ।

किन अपराधों के लिए लगो होता है ?

  • अनुसूचित जाती या अनसूचित जनजाति को अपमानित करना या उन्हें जबरन मलमूत्र खिलाना.

  • SC ST के किसी व्यक्ति का सामाजिक बहिस्कार करना.

  • SC ST के किसी व्यक्ति के साथ कारोबार करने में माना करने पर.

  • SC ST के किसी व्यक्ति को काम न देने पर या नौकरी पर ना रखने पर.

  • SC ST के किसी व्यक्ति को किसी तरह की सेवा देने से इंकार करने पर.

  • SC ST के किसी व्यक्ति से मारपीट करने पर या उनके घर के आस पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने पर या फिर उन्हें किसी तरह से परेशान करने पर .

  • SC ST के किसी व्यक्ति को नंगा करना या फिर उनके चेहरे पर कालिख पोतने पर.

  • किसी भी तरह सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने पर.

  • उनकी जमीन पर जबरन कब्ज़ा करने पर या फिर गैर क़ानूनी ढंग से किसी के जमीन को हथिया लेने पर.

  • उसे बंधुवा मजदुर बनाने पर.

  • वोट देने से रोकने पर या किसी खास प्रत्याशी को वोट देने के लिए बाध्य करने पर.

  • किसी महिला को अपमानित करने पर.

  • किसी सार्वजनिक जगह पर जाने से माना करने पर.

  • SC ST के किसी व्यक्ति को अपना मकान छोड़ने को मजबूर करने पर.

इन सभी अपराधों में भारतीय दंड संहिता के साथ SC ST एक्ट भी लगाया जाता है ।

अगर कोई सरकारी कर्मचारी भी किसी SC ST के ऊपर कोई अपराध करता है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाती है जिसके 6 महीने टेक की अलग से जेल या उम्र कैद हो सकती है और जुर्माना भी देना पड़ता है और अगर अपराध किसी सरकारी अधिकारी ने किया है तो आईपीसी के अलावा SC ST एक्ट के तहत 6 महीने से 1 साल तक जेल की सजा हो सकती है । हर राज्य के SC ST के लिए विशेष तरह की अदालते बनायीं गयी है । अगर अपराध करने वाला व्यक्ति सरकारी कर्मचारी नहीं है तो उसपर तुरंत कार्यवाही की जाती है और उसे जेल भेज दिया जाता है । ऐसे में अग्रिम जमानत की व्यवस्था नहीं है ।गिरफ़्तारी के बाद निचली अदालत जमानत नहीं दे सकती उसके लिए हाई कोर्ट जाना पड़ता है और पुलिस को गिरफ़्तारी के 60 दिनों के अंदर चार्ज शीट दाखिल करनी होती है जिसके बाद पुरे मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होती है जो SC ST के मामलो की सुनवाई के लिए बनाई जाती है ।

2016 में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक देश भर में कुल 11060 मामले दर्ज हुए जो SC ST एक्ट के तहत थे इनमे से जांच करने पर पाया गया की 935 पूरी तरह से बेबुनियाद है । इस एक्ट में शिकायत दर्ज होते ही गिरफ़्तारी हो जाती है, ऐसे में यह कानून हमेसा विवाद में रहा है । इस कानून का इस्तेमाल आपसी रंजिस के लिए किया जाने लगा था कानून का दुरुपयोग होने लगा था ।

सुप्रीम कोर्ट के नए संसोधन के अनुसार SC ST के समाज में जातिवाद को बढ़ावा दे रहा है जिसकी वजह से लोगो में SC ST के खिलाफ नफरत बढ़ सकती है क्युकी इसमें तुरंत गिरफ़्तारी हो जाती है चाहे वह व्यक्ति सरकारी कर्मचारी क्यों ना हो । सुप्रीम कोर्ट के नए संसोधन के अंतर्गत SC ST एक्ट के तहत दर्ज मामलो की जांच कम से कम डिप्टी एसपी रैंक का अधिकारी करेगा जो की पहले इंसपेक्टर रैंक का अधिकारी करता था । दूसरा सुधर यह किया गया है की अगर किसी सरकारी कर्मचारी पर कोई आरोप लगता है तो गिरफ़्तारी तुरंत नहीं होगी पहले उस सरकारी अधिकारी के विभाग से इज़ाज़त लेनी होगी । कारणों की जांच होगी पहले जो की मजिस्ट्रेट करेगा उसके बाद ही उसे गिरफ्तार किया जायेगा ।

सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच ने यह फैसला लिया है जिसमे न्यायाधीश ए के गोयल और न्यायाधीश U U ललित शामिल थे । अब इन मामलो के तहत दर्ज मामलो के अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं था लेकिन अब अग्रिम जमानत लिया जा सकता है, जो अब मजिस्ट्रेट दे सकता है ।आम आदमी की भी गिरफ्तारी SC ST के तहत दर्ज मामलो में अब तुरंत नहीं होगी बल्कि अब मजिस्ट्रेट उसका जांच करेगा उसके बाद ही गिरफ़्तारी की जाएगी ।