कांग्रेस को मिल गया दूसरा मनमोहन

4 months ago Newspadho 0

देश को धर्म और जाति के नाम पर बाँट कर 60 सालो से ज्यादा समय तक राज करने वाली एक ऐसी रजिनितक पार्टी जो सत्ता सुख पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है उस पार्टी ने आखिर कार 10 सालो बाद एक न बोलने वाले और सोनिया गाँधी के इशारो पर काम करने वाले मनमोहन सिंह की तरह वफादार ढूंढ निकाला है । बिलकुल सही पढ़ा आपने लगातार चुनाव हारने का रिकॉर्ड बना चुकी पार्टी ने दूसरा मनमोहन सिंह ढूंढ निकाला है । हम बात कर रहे है कांग्रेस की जिसका चुनाव हारने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और जनता का विस्वाश खोती कांग्रेस जो अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है और क्षेत्रीय दलो की गोद में जा बैठी है । संवैधानिक संस्थाओ जैसे की उच्च न्यायलय और चुनाव आयोग तक पर सवाल उठाने वाली इस पार्टी को एक नया मनमोहन सिंह मिल गया है । हर चुनाव के हारने के बाद ईवीएम पर सवाल उठाने वाली इस पार्टी के नए मनमोहन सिंह है कर्णाटक में भारी उठा पटक के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले कुमार स्वामी ।

हालही में मीडिया से बात करते हुए कुमार स्वामी ने कहा मै कांग्रेस की बदौलत मुख्यमंत्री हु ना की जनता की बदौलत, जनता ने मुझे बहुमत नहीं दिया । सरकार चलाने को लेकर मज़बूरी ज़ाहिर करते हुए कुर्सी के लिए कर्नाटक को दाव पर लगाने वाले कुमार स्वामी ने कहा मै कांग्रेस कि दया पर हु मै राज्य के विकाश के लिए जिम्मेदार हु ये बात अलग है मगर चुकि मुख्यमंत्री कि कुर्सी मुझे कांग्रेस कि वजह से मिली है तो मुझे मुख्यमंत्री के तौर पर नौकरी करनी है और कोई भी निर्णय लेने से पहले मुझे कांग्रेस के नेताओ से आदेश लेना पड़ेगा, बिना उनके आदेश के मै कुछ नहीं कर सकता क्युकी उन्होंने मुझे सपोर्ट किया है ।हलाकि कांग्रेस ने यह कहते हुए इस बात से पल्ला झाड़ लिया कि यह उनका अपना विचार है हम साथ मिल कार सरकार चलाएंगे । हमने जो भी वादा किया है उसे पूरा करेंगे । कुमार स्वामी के इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कि है । कांग्रेस और जेडीएस में सरकार बनाने और मंत्रिमंडल तय करने को लेकर मन मुटाव कि खबरे भी आ चुकि है । कुछ दिन पहले कांग्रेस कि तरफ से बयान आया था कि कुमार स्वामी पुरे 5 साल तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे ।

आने वाले साल 2019 में देश में लोक सभा चुनाव होने है जिसके लिए तैयारियां जोरो पर है पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी तैयारियों में जुटे है । यह चुनाव बीजेपी बनाम तमाम के बिच होने वाला है क्युकी जिस तरह से कर्नाटक में सपथ ग्रहण समारोह में एक दूसरे पर कुत्ते कि तरह वार करने वाली सभी क्षेत्रीय और विपक्षी पार्टिया एक साथ देखि गयी उस से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह का चुनाव होने वाला है और कितना कड़ा मुकाबला होने वाला है । केंद्र में बीजेपी के चार साल पुरे होने के उपलक्ष्य में बीजेपी ने अपनी उपलब्धिया गिनाई वही सिमट रहा विपक्ष एक दूसरे का हाथ थामे बीजेपी के खिलाफ विश्वासघात रैली निकलने में व्यस्त रहा ।बीजेपी का डर इस तरह से भी देखा जा सकता है कि कैराना में हो रहे उप चुनाव में तीन राजनितिक दलो ने मिलकर एक कैंडिडेट मैदान में उतारा और मुकाबला बीजेपी बनाम विपक्ष का है । चुनाव से पहले ही विपक्ष ने इसका साम्प्रदायिकरण करना नहीं छोड़ा और एक बार फिर से अपना पुराना ईवीएम राग शुरू कर दिया और चुनाव आयोग कि निष्पक्षता के बारे में सवाल उठाये गए । हर चुनाव कि तरह इस उप चुनाव को भी लोक सभा चुनाव से जोड़ कार देखा जा रहा है ।कुमार स्वामी का यह कहना एक तरह से जनता के द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान है ।कुमार स्वामी की पार्टी जेडीएस को कर्नाटक चुनाव में सिर्फ 37 सीटे मिली थी बावजूद इसके वह कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने में सफल रही ।कुमार स्वामी ने चुनाव से पहले किसानो का कर्ज माफ़ करने का वादा किया था मगर मुख्यमंत्री बनते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के कदमो पर चलते हुए अपने वादे से U टर्न ले लिया । 

अब देखने वाली बात यह है कि आने वाले कितने समय तक कुमार स्वामी मिली जुली और जनता के आदेश कि अवहेलना कर के बनाई गयी सरकार को चला पाते है । ऐसे में जनता को चाहिए कि आने वाले लोक सभा चुनाव में वह अपने मताधिकार का प्रयोग करे और देश और राज्य को यह बहुमत और मजबूती की सरकार दे क्युकी नफरत का आलम यह है कि सरकार का विरोध करते करते आज कल लोग अपने देश तक का विरोध कार जाते है जो देश के लिए हानिकारक है जनता को अपना फैसला देश हित में लेना चाहिए और देश और राज्य का शाषन उचित और शक्तिशाली हाथो में सौपना चाहिए ।