TDP का सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

9 months ago Newspadho 0

पिछले कुछ दिनों से संसद में काफी हंगामा चल रहा है। आंध्रप्रदेश के लिए स्पेशल स्टेटस को लेकर । बीजेपी के सहयोगी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी की मांग है कि आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस दिया है और इसी मांग को लेकर तेलुगु देशम पार्टी और बीजेपी के बीच दरार आ गयी है । चंद्र बाबू नायडू ने इसी वजह से सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। तेलंगाना के आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद राजधानी हैदराबाद तेलंगाना को दे दिया गया हालांकि 10 सालो तक हैदराबाद ही दोनों राज्यो की राजधानी रहेगी। स्पेशल स्टेटस की मांग को केंद्र सरकार ने ठुकरा दिया।

गौरतलब है कि आने वाले दिनों में हैदराबाद में चुनाव होने है तो ऐसा माना जा रहा है कि ऐसा चंद्र बाबू नायडू जनता के समर्थन पाने कर लिए भी कर रहे है ताकि जनता की सहानुभूति उनके साथ रहे और वो चुनाव जीत जाए । अगर तेलुगु देशम पार्टी का पिछला इतिहास देखा जाए तो ये साबित होता है कि पार्टी के लिए सत्ता सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़े किसी से भी समर्थन लेना पड़े ।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव ?

अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास मत दोनो सुनने में लगभग एक जैसे शब्द है लेकिन मतलब दोनो का बिल्कुल अलग है। लोकसभा या राज्य सरकार की असेंबली में सत्ताधारी पार्टी को ये साबित करना होता है कि सरकार चलाने जितने संसद है वरना उनको सरकार से स्थिफा देना पड़ता है और यह पूरी प्रक्रिया वोटिंग के आधार पर होती है । भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार सरकार चलाने के लिए कैबिनेट को सदन के प्रति जवाबदेह होना होता है । अनुच्छेद 118 के तहत सदन अपने नियम खुद भी बना सकते है। इसी अनुच्छेद के नियम 198 कद अनुसार अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्षी पार्टी के सदस्य को पहले लोकसभा स्पीकर को नोटिस देने होता है कि किन कारणों से वह अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है , स्पीकर उस नोटिस को सदन में पड़ता है और उसका समर्थन 50 विधायक या सांसद करते है अविश्वास प्रस्ताव चर्चा के लिए स्वीकार किया जाता है जिसकी तिथि स्पीकर तय करता है । उसके बाद उसकी वोटिंग होती है ।

विश्वास मत इसके विपरीत होता है विश्वास मत में कोई भी एक प्रस्ताव जिसपर सदन में वीते पड़े यह प्रस्ताव किसी भी तरह का हो सकता है । इस से यह साबित किया जाता है कि सरकार को कितने लोग समर्थन देते है। विश्वास मत सरकार की तरफ से लाया जाता है । ये भी वोटिंग की द्वारा होता है। यह टैब होता है जब किसी चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नही मिलता ओर टैब सरकार विस्वास मत के द्वारा ही बनाई जाती है।

इन दोनों प्रस्तावों में अगर सरकार जीत नही हासिल कर पाती तो उसे स्थिफा देना होता है या फिर सदन भंग करना होता है और अगर सदन भंग होने पर दुबारा चुनाव होते है।

स्पीकर इन दोनों प्रस्तावों में भाग नही लेता लेकिन अगर विपक्ष और सरकार दोनो के बीच बराबर वोटिंग होती है तो स्पीकर भी अपना वोट देता है और जिस तरफ स्पीकर का वोट जाता है वही विजयी घोषित होता है । अगर तेलुगु देशम पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाती भी है तो अभी बीजेपी गठबंधन में सिर्फ बीजेपी के पास 275 सदस्य है जिस से सरकार पर कोई असर नही पड़ेगा।