अश्काबाद समझौते में भारत शामिल हुआ

9 months ago Newspadho 0

अश्काबाद के बारे में बात करने से पहले इसकी हिस्ट्री जान लेना आवश्यक है, 1947 भारत आज़ाद हुआ और आज़ादी के साथ ही भारत बहुत सारी चुनौतियां तोहफे में मिली । जब भारत आज़ाद नहीं हुआ तब आज़ादी के कर्णधारो का मानना था की जब भारत आज़ाद होगा तब ये एक तेज़ी से विकसित होते हुवे देश के रूप में सामने आएगा हलाकि उस वक़्त भारत से पाकिस्तान अलग नहीं हुआ था और विद्वानों का ऐसा मानना लाज़मी था क्युकी भारत उस टाइम अखंड था और उसमे से न ही कोई बांग्लादेश बना था न ही पाकिस्तान तो पूर्ववर्ती भारत को लेकर ऐसा मानना था । ऐसा मानना था की आज़ादी के बाद हम सुपर पावर बन जायेंगे जो की आज तक तो संभव नहीं हो पाया है । ऐसा मन जाता था की ट्रेड में इंडिया की अच्छी कमाई होगी क्युकी उस वक़्त एक्सपोर्ट करने के लिए बहुत कुछ था । तब पाकिस्तान बना नहीं था और भारत आसानी से अफगानिस्तान ईरान पुरे यूरोप और रूस के साथ ट्रेड सम्बन्ध स्थापित कर के आसानी से आगे जा सकता है। लेकिन भारत को अंग्रेज़ो ने इस तरह से बाटा जिस से की जो भारत की भौगोलिक स्थिति उसका फायदा नहीं उठाया जा सका ।

अगर पाकिस्तान अलग नहीं हुआ होता तो भारत आसानी से तजाकिस्तान और सेंट्रल एशिया और यूरोप में ट्रेड कर सकता था। पाकिस्तान बन जाने से जो जमीनी रस्ते है जो की अफगानिस्तान, ईरान और तुर्कमेनिस्तान को जाते थे वो भारत के लिए बंद हो गए । पाकिस्तान से कब्जे वाले कश्मीर से भी रास्ते की संभावना थी वो भी पाकिस्तान के द्वारा कब्जे की वजह से समाप्त हो गयी । डेनिस hastert ने कहा था ट्रेड से नौकरीया बढ़ती है और गरीबी समाप्त होती है सोसाइटी का निर्माण होता है और आगे सोसाइटी आगे बढ़ती है , और एक स्थापित सोसाइटी से बढ़कर कुछ नहीं जो आतंकवाद से लड़ सके और गणतंत्र को मजबूती आज़ादी और कानून मिले.”

भारत ने हलाकि ट्रेड के नए रास्ते बना लिए है अश्गाबात संधि का सदस्य बनकर । अश्गाबात संधि में पहले से ही कुछ देश शामिल थे जो की क्रमशः ईरान, ओमान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कज़ाकिस्तान और अफगानिस्तान है । भारत ३ फरवरी 2018 से इस संधि में शामिल हुआ । इस संधि में कोई शामिल कोई भी देश अपने व्यापार से सम्बन्धित गुड्स ले जाता है तो आसानी से बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन और बिना किसी रोक टोक के इन देशो के रास्ते आगे के देशो तक जा सकता है । इस संधि में शामिल होने के बाद भारत के व्यापार बढ़ने की काफी संभावना है क्युकी भारत अब आसानी से अश्गाबाद, ताशकंद, अल्माटी और उरुमकी तक अपने सम्पर्क बना सकता है । भारत अब आसानी से सेंट्रल एशियाई देशो तक अपनी पहुंच बना सकता है ।