कांग्रेस का दूसरा महाभियोग

1 month ago Newspadho 0

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा एक बार फिर से चर्चा में है कारण है जस्टिस लाया का मामला जिसको हाई कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने सुना और बताया की इसमें कोई आधार नहीं है । इस 3 जजों की बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा भी शामिल थे । दीपक मिश्रा के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के कांग्रेस के साथ मिलकर राज्यसभा में श्री वेंकैया नायडू को प्रस्ताव सौपा है । एक चार्ज शीट पेस की गयी मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके कपिल सिब्बल के द्वारा जो चांदनी चौक से सांसद भी रह चुके है । चार्ज शीट में कपिल सिब्बल ने कई इलज़ाम गिनाए है ।लोकतंत्र खतरे में है ये इलज़ाम बीजेपी पर मढ़ने वाली कांग्रेस के पूर्व मंत्री सिब्बल ने कुल पांच इलज़ाम लगाए है जिनमे से कुछ समय पूर्व चार जजों के द्वारा किया गया पाखंड भी एक है ।

महाभियोग में राज्यसभा के 71 सांसदों का हस्ताक्षर है जिसमे से 7 पहले ही रिटायर्ड हो चुके है और 64 कार्यरत है ।राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कुल 50 राज्य सभा सांसदों के समर्थन की जरुरत होती है और लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कुल 100 सांसदों के समर्थन की जरुरत होती है । अब यह मामला राज्य सभा के सभा पति वेंकैया नायडू के पास है जो इस प्रस्ताव को अगर स्वीकार करते है तब इसपर आगे की कार्यवाही की जाएगी । संविधान की धरा 124 के तहत अगर संसद चाह दे तो चीफ जस्टिस को अपना पद छोड़ना पड़ता है । चीफ जस्टिस को हटाने के लिए संसद के तीनो हिस्सों लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति तीनो को एक साथ आना पड़ता है या फिर लोकसभा और राज्यसभा में 2 तिहाई बहुमत लाते है तो राष्ट्रपति को एक चिठ्ठी जाती है जिसकपर राष्ट्रपति विचार करते है और अपना दस्तखत करते है जिसके बाद चीफ जस्टिस को अपना पद त्यागना पड़ता है ।

यदि वेंकैया नायडू इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते है तो जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 के तहत तीन लोगो की एक कमिटी बनायीं जाएगी जिसमे सुप्रीम कोर्ट का एक चीफ जस्टिस भी शामिल होगा साथ ही हाथ हाई कोर्ट का एक जज भी शामिल होगा और एक लॉ एक्सपर्ट भी शामिल होगा । ये लोग मिलकर लगाए गए आरोपों पर जांच करेंगे और अपनी रिपोर्ट पेस करेंगे । सभा पति इस पर समय सिमा तय करता है । जिसके बाद लोकसभा और राज्य सभा में समर्थन ढूढने के बाद कांग्रेस को अपना पक्ष रखना होगा । राज्य सभा में कांग्रेस, समाज वादीपार्टी, बसपा,राजद सीपीआई और एनसीपी ये सभी दलों ने मिलकर ये महाभियोग लाने का निर्णय लिया है । राज्य सभा में कांग्रेस के 54 सांसद है और डीएमके के 4 सांसद है, टीएमसी के 12 सांसद और बीजेडी के 8 सांसद है, सपा के 3 सांसद और टीडीपी के 5 सांसद है जिनसे कांग्रेस समर्थन की मांग कर सकती है । अगर राज्य सभा में 2 तिहाई बहुमत कांग्रेस को मिल भी जाता है फिर भी महाभियोग पास नहीं हो सकता है ।