आतंकवाद को भगवा बताने वाली कांग्रेस का पर्दाफाश

1 month ago Newspadho 0

लाशो और बलात्कार पर रानजीतिक रोटियां सेकने वाली पार्टी कांग्रेस की दरें दिन प्रतिदिन खुलती जा रही है । हाल ही में हुए देश में बलात्कारों में सिर्फ कठुवा और उन्नाव गैंगरेप को अपनी सुविधा के अनुसार अपने सहयोगी देशद्रोहियो के साथ मिलकर तूल देने वाली कांग्रेस पार्टी को जोरदार झटका तब लगा जब कांग्रेस के ही द्वारा आतंकवाद का धर्म निर्धारित करने की साजिश को कोर्ट अपने फैसले के माध्यम से नकार दिया । आसिफा मर्डर केस की ही तर्ज पर 18 मई 2007 को कांग्रेस ने एक और साजिश रची थी जिसका मकसद था हिन्दू धर्म को आतंकवाद से जोड़ कर उसे बदमान करना, जिसमे कुछ हद तक कामयाब भी रही पार्टी अपने शाषन में कई सारे हिन्दू संतो को किसी ना किसी शाजिस में सजा दिलाकर उन्हें जेल भेजा ।

इतिहास इस बात का हमेशा से गवाह रहा है की कांग्रेस सत्ता सुख पाने के लिए शाम दाम दंड भेद सब अपनाये है । चाहे आज़ादी से पहले की बात की जाये या फिर आज़ादी से बाद की । आज़ादी से पहले अपने ही स्वतंत्रता सेनानियों को आतंकवादी बुलाना हो या फिर उनका भेद अंग्रेज़ो को देकर उनको पकड़वाना और जेल की सलाखों के पीछे भेजना हो या फिर सत्ता के लिए देश का बटवारा करना हो । जब जब कांग्रेस सत्ता से बाहर रही है तब तब देश में दंगे कराये है और हिन्दुओ को बाटने की साजिश की है, लाशो तक पर राजनीती करने वाली पार्टी ने हैदराबाद के मक्का मस्जिद में अपने ही गुर्गो के द्वारा धमाके कराये और उसका इलज़ाम हिन्दू संतो पर मढ़ दिया सत्ता में होने की वजह से अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए इस घटना में अपने कार्यकर्ताओ का नाम तक आने नहीं दिया । मस्जिद में धमाके हुए जिसमे 8 लोग मारे गए और 58 लोग घायल हो गए । घटना के बाद पुलिस की गोली से 5 और लोगो की मौत हो जाती है । इस केस में 2 एफाईआर दर्ज किया गया था जिसकी जाँच देश की 2 बड़ी एजेंसियो की तरफ से किया जा रहा था । इस घटना में स्वामी असीमानंद को मुख्य आरोपी बनाया गया जिनके साथ कुछ और लोगो पर भी धमाके कराने का आरोप लगाया गया । इस हमले के बाद मुस्लिम आतंकवाद का धर्म न पहचानने वाली कांग्रेस ने जिसको आतंकवाद का धर्म अब तक नहीं पता था अपनी शब्दावली से हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्द निकाले।

इस धमाके की जाँच कर रही एजेंसी एनआईए की हैदराबाद की विशेष अदालत ने सबूत ना मिलने के कारण 7 अभियुक्तों को बरी कर दिया जिनमे स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, लक्ष्मण दास महाराज, मोहन लाल का नाम है 2 लोगो को अभी भी इस केस में भगौड़ा घोषित किया गया है जिनका नाम है रामचंद्र और संदीप है जिनपर अभी केस चलना बाकी है जब ये पकडे जायेंगे तब इनपर केस चलाया जायेगा ।यह मामला 2007 का था जिसकी शुरुआती जाँच पुलिस ने किया फिर केस सीबीआई को सौप दिया गया उसके बाद एनआईए को जांच की जिम्मेदारी सौपी गयी ।मस्जिद में पाइप बम से यह धमाका किया गया था जो की संगमरमर के चबूतरे के निचे हुआ था । 2 बम फट नहीं पाए थे जिनकी फॉरेंसिक जाँच में पाया गया था की इसको बनाने के लिए पाइप में कील का उपयोग किया गया था जिसको एक मोबाइल फ़ोन के टाइमर के द्वारा कंट्रोल किया गया था । शुरुआत में इसमें पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया गया, उसके बाद हैदराबाद के ही 40 मुस्लिम युवको को गिरफ्तार कर उनसे पूछ ताछ की गयी जिनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिल पाया और उन्हें बरी कर दिया गया । इसके बाद मामला सीबीआई को सौप दिया गया जिसने शुरुआत में हिन्दू संगठन अभिनव भारत का नाम उजागर किया । 2010 स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया गया और बताया गया की इन्होने धमाके की प्लानिंग की है ।

इस घटना के बाद की कांग्रेस ने आतंकवाद को भगवा से जोड़ दिया । अब सवाल यह है की क्या कांग्रेस जो 2G घोटाले पर फैसला आने पर खुसी का इज़हार कर रही थी और फैसले का स्वागत किया था क्या वही पार्टी इस फैसले का भी स्वागत करेगी, क्या लाशो पर राजनीती करने वाली पार्टी इस बार भी मोमबत्ती लेकर बहार निकलेगी या फिर पुरे देश से माफ़ी मांगेगी ? एक सीनियर अधिकारी ने कहा है की केस फर्जी तथ्यों के आधार पर बनायीं गयी थी इसलिए इसमें हैरानी वाली बात नहीं है वही बीजेपी कांग्रेस से पुरे देश से माफ़ी मांगने की मांग कर रही है जबकि कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत ने कहा की अदालत के फैसले पर हम कुछ नहीं कहना चाहते यह एनआईए को सोचना है की उनकी जांच कितनी पुख्ता थी ।कांग्रेस के द्वारा बनायीं गयी हिन्दू टेरर की थ्योरी फेल हो गयी है । इस केस में कर्नल पुरोहित का भी नाम जोड़ा गया था जिनको मालेगाव ब्लास्ट में पहले ही बेल मिल चुकी है ।एनआईए की तरफ से इस मामले में अभी प्रतिक्रिया आनी बाकि है एजेंसी ने अभी यह नहीं बताया की मामले को ऊपरी अदालत में ले जाया जायेगा या नहीं ।