बलात्कार पर मीडिया का दोहरा रवैया

1 month ago Newspadho 0

भारतीय मीडिया जो की दुनिया की सबसे नीच और गिरी हुई मीडिया है । जो की टीआरपी पाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है उसका एक उदहारण हालही में पेश किया है भारतीय मीडिया ने । अगर आज आप टीवी ऑन करेंगे तो हर जगह सिर्फ 2 खबरे दिखेंगी बलात्कार की एक जो की जम्मू और कश्मीर में हुआ जिसमे एक 8 साल की मासूम बच्ची का बेरहमी से बलात्कार किया गया और उसे मार दिया गया और दूसरा उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हुआ जिसमे एक ऐसी लड़की शामिल है जो पहले भी लोगो पर ऐसे आरोप लगा चुकी है और यह बलात्कार उसके पारिवारिक मित्र के द्वारा ही किया गया है जिसमे एक विधायक का नाम जोर शोर से सामने आ रहा है । हद तो इस बात की है की जम्मू कश्मीर में हुए बलात्कार में प्रधानमंत्री तक को निशाने पर लिया गया और उन्नाव में हुए कांड के लिए CM योगी से अखिलेश स्तीफा तक मांग बैठे ।

यह वही बिकाऊ मीडिया है जो किसी भी खबर में मसाला ढूंढती है इनको हर खबर में हिन्दू मुस्लिम दीखता है । तथाकथित मीडिया पीड़ितों को और किसी तरह की मदद भले न करे लेकिन पीड़ित के नाम अपनी जेबे जरूर भर लेते है । चार दिनों बाद केस में क्या हुआ ये तक नहीं दिखाएगी यह मीडिया लेकिन पीड़ितों के जख्मो पर नमक लगाने का काम बखूबी करते है । कठुआ में हुए बलात्कार में पुलिस प्रशासन भी शामिल है लेकिन इसमें गलती केंद्र सरकार तक की मानी जा रही है । उन्नाव में हुए बलात्कार के केस में एक ऐसा सत्ता का लोभी शामिल है जो राजनितिक रुख देख कर अपनी पार्टी बदलता है उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले उसे जब भनक लगी की इस बार सरकार बीजेपी की बनने वाली है तो बीजेपी में शामिल हो गया । बीजेपी की इसमें गलती यह रही की बिना किसी जाँच के किसी को भी पार्टी में शामिल कर लिया अब पूरा का पूरा मामला बीजेपी के ऊपर आ गया है ।

बलात्कार सिर्फ कठुआ और उन्नाव में ही नहीं हुआ बलात्कार 6 की मासूम का बिहार के सासाराम में हुआ जहा आरोपी युवक एक मुस्लिम था, कोलकाता में भी 6 साल की एक मासूम की इज्जत एक मौलवी ने लूटी लेकिन इस पर मीडिया में एक मिनट की खबर तक नहीं चली क्युकी यहाँ टीआरपी नहीं मिल सकती क्युकी आरोपी मुस्लिम है । उन्नाव केश सीबीआई को सौपी जा चुकी है और इसमें आरोपी विधायक गिरफ्तार भी हो गया है लेकिन फिर भी सासाराम और कोलकाता में हुए बलात्कार पर खबर चलने का वक़्त मीडिया के पास नहीं है । आसाम में दलित बच्ची का कुछ अवैद्य बांग्लादेशियो ने बलात्कार किया और उसे मर डाला इस पर दलित प्रेमी राहुल गाँधी और मायावती या विपक्ष के किसी भी नेता का एक ट्वीट तक नहीं आया अभी तक ।

बरसाती मेढक की तरह सिर्फ चुनाव के समय में दिखने वाली प्रियंका गाँधी ने rat के समय में कैंडल मार्च निकला जिसमे उनके साथ उनके ही पार्टी के कार्यकर्ताओ ने बदसलूकी की जिसमे उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओ के ऊपर आरोप लगाया । विपक्ष इन दोनों घटनाओ पर सरकार को घेर रही है जबकि देश में अन्य 4 बलात्कार की घटनाओ पर विपक्ष के द्वारा एक शब्द भी सुनने को नहीं मिला । निर्भया कांड के समय के यही विपक्ष केंद्र में भी था और राज्य में भी, बावजूद इसके सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी थी और 1992 में जब हिन्दुओ के साथ कुकर्म किये गए और उनकी मासूम बच्चियों का बलात्कार किया गया और उन्हें मर दिया गया तब यही पार्टिया एक शब्द भी नहीं बोल पायी थी । कश्मीरी पंडितो को उनके अपने ही घर से भगा दिया गया तब से अब तक वो अपने घर वापस नहीं जा सके लेकिन विपक्ष उनेक लिए कभी एक शब्द नहीं कहता और न ही कोई ट्वीट होता है । हालही में बंगाल और बिहार दोनों जगहों पर दंगे हुए थे जिसमे मीडिया के धर्म के चश्मे से सिर्फ बिहार का दंगा दिख पाया था क्युकी यहाँ पर मुसलमान मारा गया था । बंगाल में हिन्दुओ के घर जला दिया गया उनकी बच्चियों के साथ घिनौनी हरकते की गयी लेकिन इसकी खबर डाब के रह गयी कोई सुनने वाला नहीं था ।

यह एक गहरा सच है भारतीय मीडिया का की यह टीआरपी के लिए किसी भी बाद तक गिर सकते है श्रीदेवी के मरने पर टब तक में बैठ कर यह साबित करती रही की कितने गहरे टब में नाहा रही थी और कैसे डूबी । अब इनके पास एक बलात्कार की खबर है जिसको धार्मिक रंग दे दिया गया है और एक एजेंडे के तहत इस खबर को दिखाया जा रहा है, यही मीडिया कुछ दिनों बाद इस खबर को भूल जाएगी और एक मिनट की कवरेज नहीं दी जाएगी इस खबर को । सरकार को भी अब चाहिए की मीडिया के लिए खबरों के पैमाने तय किये जाये और ऐसी नफरत फ़ैलाने वाली पत्रकारिता पर रोक लगायी जाये ।