अन्ना का अनसन ख़त्म

2 months ago Newspadho 0

खुद को समाज सेवी बताने वाले और गाँधी की उपाधि पाने की चाह रखने वाले किसन बाबूराव हजारे यानि अन्ना हज़ारे ने पिछले चुनाव की तरह इस बार भी आने वाले चुनाव को देखते हुए फिर से आंदोलन शुरू किया था लेकिन अपनी बिगड़ती हुई हालत देखते हुए और लोगो की उनके आंदोलन के प्रति रूचि काम होते देखते हुए राम लीला मैदान में जारी अपना भूख हड़ताल ख़त्म कर लिया है ।

अन्ना का यह अनशन 23 मार्च से जारी था जिसमे अन्ना ने सशक्त लोकपाल चुनाव प्रक्रिया में सुधर और किशानो के लिए कुछ मांगे राखी थी । जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार से मिले आश्वासन के बाद अन्ना ने यह फैसला लिया। अन्ना ने अनशन गिरीश महाजन और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने के बाद ख़त्म किया । अन्ना आंदोलन से पहले चार्टर प्लेन से रामलीला मैदान पहुंचे थे और अनसन शुरू किया था । अन्ना के आंदोलन में पिछले आंदोलन इ मुकाबले काफी काम भीड़ देखने को मिली, भूख हड़ताल ख़त्म करने का एक यह भी कारण हो सकता है । भूख हड़ताल की वजह से अन्ना का वजन 5 किलो काम हो गया है । आंदोलन की समाप्ति अन्ना ने मंत्रियो की तरह से जूस पी कर किया । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जूस अन्ना को पिलाया ।

80 साल के हो चुके अन्ना ने भूख हड़ताल शुरू करने से पहले कहा था की मोदी सरकार को गिराने के लिए मै मरने को भी तैयार हु । जिसकी वजह से अन्ना को सोशल मीडिया पर मोदी समर्थको ने अड़े हाथ लिया था और काफी ट्रोल किया । अनशन में भीड़ न आने की एक वजह से भी रहा की अन्ना ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ और वर्तमान सरकार के खिलाफ इस तरह की बात की, हलाकि सोशल मीडिया पर इस बात के लिए काफी बेइज़ती की गयी ।

इस से पहले भी साल 2011 में अन्ना ने सशक्त लोकपाल बिल को लेकर आंदोलन किया था जिसके बाद मफलर मन के नाम से मशहूर और दूसरी राजनितिक पार्टियों पर इल्जाम लगाने और माफ़ी मांगने के लिए प्रशिद्ध नेता अरविन्द केजरीवाल और कर्मठ नेता किरण बेदी जैसे लोग निकल कर सामने आये थे । हलाकि केजरीवाल ने कभी भी किसी तरह की राजनीती करने से इंकार किया था लेकिन बाद में एक तानाशाह पार्टी बनायीं जिसका नाम आम आदमी पार्टी रखा गया जिसके बारे में जितनी चर्चा की जाये कम है कभी कमिशनर को घर बुलाकर पिता जाता है तो कभी मानहानि के दर से माफ़ी मांगनी पड़ती है ।

अन्ना ने कहा मैंने सरकार को 6 महीने के समय दिया है अगर अगस्त तक सरकार इस पर कुछ कम नहीं करती है तो सितम्बर में आंदोलन दुबारा शुरू होगा जिसपर सरकार की तरफ से अस्वासन दिया गया है की जितना जल्दी हो सकेगा लोकबाल बिल लाया जायेगा फडणवीस ने कहा है की हम 6 महीने से ज्यादा का समय नहीं लेंगे ।अन्ना के मुख्या शिष्यों में से एक कवि कुमार विस्वास इस बार आंदोलन में कही नज़र नहीं आए ।

अन्ना का ये 6 महीने का समय देना देखते हुए ये कहा जा सकता है की अन्ना का आंदोलन लोकपाल के लिए कम और मोदी सरकार के खिलाफ ज्यादा है । इस से पहले भी अन्ना की वजह से दिल्ली को एक नाकारा मुख्यमंत्री मिल चूका है जिसने अपने बच्चो के सर पर कसम खायी थी के कभी भी कांग्रेस का समर्थन नहीं लूंगा और अपने पलटने की आदत की बरक़रार रखते हुए चुनाव के बाद कांग्रेस का समर्थन लिया था और अपनी प्रधानमंत्री बनने की बढ़ती चाह को देखते हुए 2014 लोकसभा चुनाव से तक पहले ये कहते हुए स्तीफा दिया की कांग्रेस उन्हें कम नहीं करने दे रही । 49 दिनों में सरकार छोड़कर भागने वाले केजरीवाल को एक बार फिर दिल्ली की जनता की मुफ्तखोरी का समर्थन मिला और सरकार बनने में कामयाब रहे तब से लेकर अब तक केंद्र सरकार और अन्य पार्टियों पर खली इल्जाम लगाए है कम करने की बजाए । कभी समोसे और थाली की वजह से चर्चा में रहते है और कभी माफ़ी मांगने की वजह से । शायद इसी अंदाज को जनता भांप चुकी है जिसकी वजह से आंदोलन पूरी तरह को नकार दिया गया । 2019 में फिर से चुनाव आने वाले है और अन्ना न निर्णय फिर से चुनाव से पहले अनशन करने का है जिसके पीछे कुछ भी मकसद हो सकता है ।