मायावती की एक हाथ दो एक हाथ लो की रणनीति हुई फेल

3 months ago Newspadho 0

कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश में उपचुनाव हुए थे जिसके दौरान बुवा और बबुवा दोनों में एक सौदा हुवा तो जो की एक हाथ दो और एक हाथ लो वाला सौदा था । मायावती ने उपचुनाव में सपा को समर्थन देने का एलान किया था बदले में राज्यसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी के लिए सपा से समर्थन माँगा था । उपचुनाव में सपा बसपा से समर्थन से जीत तो गई लेकिन बसपा का हाथ राज्यसभा में खाली का खाली रह गया । 23 मार्च को पुरे दिन चुनाव की सम्रगर्मिया जारी रही, पुरे दिन क्रॉस वोटिंग का शिलशिला चलता रहा ।

उत्तरप्रदेश के राज्यसभा की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होने थे जिसके लिए कैंडिडेट 11 थे जिसमे से 8 सीटों पे बीजेपी की जीत तय मणि जा रही थी क्युकी बीजेपी के पास 234 विधायक थे और एक सांसद को जितने के लिए 37 वोटो की जरुरत होती है इस हिसाब से बीजेपी के 8 सांसद आसानी से जीत रहे थे जिनके लिए कुल 296 वोट चाहिए थे, इसके अतिरिक्त 28 वोट फिर भी बाकि रह रहे थे जिसके दम पर बीजेपी ने अपना एक और कैंडिडेट खड़ा कर दिया जो की ग़ज़िआबाद के एक बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल थे । बसपा की तरह से 10वे कैंडिडेट भीम राव आंबेडकर थे । 8 सीटों पे बीजेपी चुनाव जीत गयी थी और एक सीट सपा को मिली थी । मुकाबला 10वी सीट के लिए अनिल अग्रवाल और भीम राव आंबेडकर के बिच था जिसके लिए पुरे दिन वोट इधर से उधर होते रहे और आखिर कर वो सीट भी बीजेपी ने जीत लिया ।

10वी सीट के जीत के लिए कुल 37 विधायकों का समर्थन चाहिए था जो न बीजेपी जुटा पायी और न ही बसपा । राज्यसभा चुनाव के ऐसी स्थिति में प्रथम वरीयता के आधार पर निर्णय लिया जाता है लेकिन यहाँ पर प्रथम वरीयता के आधार पर नहीं बल्कि द्वितीय वरीयता के आधार पर निर्णय लिया गया । पुरे दिन क्रॉस वोटिंग का शीलशीला चलता रहा जिसमे बसपा के अनिल सिंह ने बीजेपी को वोट दिया, सपा के पूर्व विधायक विजय मिश्रा ने जो की एक समय में मुलायम और शिवपाल के काफी करीबी रहे है भी बीजेपी को वोट किया। राज्यसभा के चुनाव के एक दिन पहले इन्होने शिवपाल यादव के घर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी । नितिन अग्रवाल का वोट भी बीजेपी को गया । अमन मणि त्रिपाठी ने भी बीजेपी को वोट दिया ।इन सब के बावजूद बीजेपी को 22 वोट मिले और सपा,बसपा और कांग्रेस के गढ़बंधन को 33 वोट मिले । कोई भी पार्टी 37 वोट तक नहीं पहुंच सकी अतः दूसरी वरीयता के वोट गिने गए । अब ये स्वाभाविक था की बीजेपी के पास 234 विधायक थे तो बीजेपी का जितना तय था और यही हुआ ।

सुबह में जब चुनाव का रिजल्ट आना था तो सभी पार्टिया जीत पर अपनी दावेदारी कर रही थी, सपा के पास 47 विधायक थे मगर उनके एक विधायक हरी ओम यादव को उच्च न्यायलय ने वोट देने से रोक लगा दिया और नितिन अग्रवाल भी बीजेपी की तरफ चले गए जिसके बाद इनके पास कुल 45 विधायक रह गए जिसमे एक सीट जितने के लिए 37 वोट चाहिए थे जिसकी मदद से जया बच्चन जीत गयी । अब इनके पास 8 बचे रह गए। बसपा के 19 विधायक थे जिसमे मुख़्तार अंसारी को भी कोर्ट ने वोट देने से रोक लगा दिया और अनिल सिंह ने बीजेपी को वोट दिया अब इनके पास कुल 17 विधायक बचे और कांग्रेस के पास 8 विधायक थे तो सपा, बसपा और कांग्रेस तीनो को मिलकर 33 वोट बने । 2 निर्दलीय विधायक थे राजा भैया और विनोद सरोज जिनपे बसपा और सपा का दावा था की उन्होंने बसपा प्रत्याशी को वोट दिया है । कोई भी पार्टी 37 वोट नहीं जीता पायी अतः द्वितीय वरीयता के तहत निर्णय लिया गया और बीजेपी जीत गयी ।

उत्तर प्रदेश के उपचुनाव के बदला बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव जीत कर ले लिया और जो मीडिया चैनल्स उपचुनाव के बाद 2019 चुनाव का विश्लेषण करने लगे थे जिसमे सपा और बसपा दोनों के वोट बैंक एक साथ दिखाए जा रहे थे के ये असर होगा वो अगर होगा वो धरा का धरा रह गया ।