लिंगायत समुदाय : कांग्रेस का फुट डालो वोट पालो नीति

3 months ago Newspadho 0

लिगांयत समुफाय के लोगो को कर्नाटक सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय का स्टेटस देने का फैसला लिया है । लिगांयत समुदाय के लोग हिन्दू है और वो भगवान शिव की पूजा अर्चना करते है । लिंगायत समुदाय की जनसंख्या करीब 20 मिलियन है । अभी मामला केंद्र सरकार के पास भेजा गया है केंद्र की मुहर लगने के बाद ही ये होना संभव है ।

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और कुछ समय बाद वह चुनाव होने वाले है जिसको देखते हुए कर्नाटक सरकार ने इस मुद्दे को केन्द्र के पास भेजा है ताकि अगर केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को माने तो भी और न माने तो भी इसका फायदा कांग्रेस को ही होगा । अगर केंद्र सरकार लिंगायत को अलग समुदाय घोषित कर देती है तो जनता के मन में ये बात आएगी की कांग्रेस की सरकार की वजह से ही हमे हिन्दू धर्म से अलग किया गया है और समुदाय का 20 मिलियन वोट कांग्रेस को जाएगा और अगर केंद्र सरकार प्रस्ताव को ठुकरा देती है तो भी कांग्रेस को वोट जाएगा क्योंकि लिंगायत ये सोचेंगे कि कांग्रेस ने तो प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा था लेकिन केंद्र ने इसे रद्द कर दिया और इस तरह समुदाय का गुस्सा बीजेपी पर फूटेगा।

चुनाव से ठीक पहले किसी समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय का स्टेटस देना कांग्रेस की पुरानी नीति रही है, इस से पहले 2014 चुनाव से पहले कांग्रेस ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय घोषित किया था जिसके बाद जैन मुस्लिम , सिख , पारसी , ईसाई , और बौद्ध समुदाय के बाद छठवा अल्पसंख्यक समुदाय बन गया था । अगर लिंगयत समुदाय को ये स्टेटस मिलता है यो के सातवाँ अल्पसंख्यक समुदाय होगा।

कर्नाटक में कुल 224 सीट है जिनमे लिंगायत समुदाय का प्रभाव करीब 100 सीटो पर है । लिंगायत समुदाय की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 17 % है। लिंगायत समुदाय अभी तक बीजेपी को सपोर्ट करता रहा है । इनकी मांग है कि इन्हें हिन्दू धर्म से अलग मन जाए।

कौन है लिंगायत ?

12वी शताब्दी में के फिलॉसफर पैदा हुए जिनका नाम था वासवन्ना जो पैदाईसी ब्राम्हण थे । इनका जातिवाद में विस्वाश नही था। इन सब के बारे में इन्होंने काफी सारी कहानियां और कविताये लिखी । धीरे धीरे इनको मानने वालों की संख्या बढ़ती चली गयी और कुछ सालों के बाद इन्हें संत मानने लगे और वेद , शास्त्र और उपनिषदों को मानना बंद कर दिया इनका मानना था कि वेद शास्त्रो में ही जातिवाद को बढ़ावा दिया गया है। धीरे धीरे ये बढ़ते गए और हिन्दू पूजा पद्धति को नीचा दिखाने लगे । इनकी एक कविता भी है जिसका नाम वाचना है जिसके अंदर काफी सारी बाते हिन्दू धर्म के विरोध में लिखी गयी है। लिंगायत शिव लिंग की पूजा करते है। इनका मानना है कि भगवान हर जगह है। धीरे धीरे वासवन्ना का बनाया है धर्म बढ़ता गया जिसमे सभी जातियों के लोग थे। बाद में वीराशैव भी इनके साथ हो लिए जो कि एक और इनकी तरह का ही हिन्दुओ का ग्रुप था । हालांकि वीराशैव ये वेदों में यकीन रखते है और ये मंदिरो में भी जाते है।

जब कर्नाटक सरकार ने जब अल्पसंख्यक स्टेटस देने के लिए प्रस्ताव पारित किया तो वीराशैव को एक सुब कास्ट के रूप में लिंगायत के साथ ही रखा जिस से वीराशैव कर्नाटक सरकार ने नाराज़ है हालही में दोनों गुटों में झड़प भी हुई थीं ।

इस तरह से हिन्द धर्म को तोड़कर कांग्रेस अपने वोट बैंक बढ़ा रही है। पिछले कई राज्यो के चुनावो से पहले आरक्षण को लेकर अलग अलग जातियों को भड़काकर आदोंलन करवा कर वोट पाने की एक नाकाम कोशिश की।  अब वही काम कर्नाटक के अंदर कर रहे है ताकि इनका वोट बैंक बढ़ सके और सत्ता का सुख मिल सके।