जाने स्टेफेन हॉकिंग के बारे में

3 months ago Newspadho 1

स्टेफेन हाकिंग पैदा हुवे 8 जनवरी 1942 को और इसी तारीख को गैलीलियो गलीली का निधन हुवा था । स्टेफेन का निधन हुवा 14 मार्च को और इसी तारीख को 1879 को अल्बर्ट आइंस्टीन पैदा हुवे थे । स्टेफेन एक साधारण परिवार में पैदा हुवे और पले बढे । बचपन में पढाई में काफी कमजोर थे । लेकिन इनके माता पिता और शिक्षकों का मानना था के बड़े होकर सही हो जायेंगे । परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे की इतनी अच्छी शिक्षा दी जा सके फिर स्टेफेन ने स्कोलरशिप लेकर ऑक्सफ़ोर्ड में परीक्षा दी और फिजिक्स में पहली रैंक हासिल की और बाद में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर हुवे । स्टेफने ने जिस पद पे काम किया उसी पद पर सं 1679 से लेकर 1702 न्यूटन भी पढ़ाते थे ।स्टेफेन जब 21 साल के थे तब उन्हें मालूम पड़ा की उन्हें एक लाइलाज बीमारी है उस बीमारी का नाम है एम्योट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस। इस बीमारी में दिमाग के न्यूरॉन्स काम करना धीरे धीरे बंद कर देते है जिसकी वजह से शरीर के विभिन्न भाग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है । आम तौर पर इंसान इस बीमारी में 3 साल से ज्यादा जीवित नहीं रह पता है लेकिन स्टेफेन इस बीमारी के साथ तकरीबन 50 साल से ज्यादा जीवित रहे ।

इस बीमारी के साथ स्टेफेन ने साइंस और अकादमी में अपना करियर जारी रखा और लगातार काम करते रहे । 1985 में वो जिनेवा गए जहा पे उन्हें एक कार्यक्रम में हिंसा लेना था । तब उन्हें एक और बीमारी का दौरा पड़ा और बाद में उन्हें वेंटिलटर पर रखा गया,उस समय उनके बचने की उम्मीद काफी काम थी । तब डॉक्टर ने उनकी पत्नी से पूछा के क्या उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया जाये और शांति से मरने दिया जाये । तब उन्होंने कहा की नहीं जब तक वो जिन्दा रहेंगे तब तक उनका इलाज किया जायेगा । उसके बाद उनकी पत्नी उन्हें कैंब्रिज लेकर गयी । डॉक्टर्स ने उन्हें जीवनदान तो दे दिया लेकिन स्टेफेन ने बोलने की शक्ति खो दी क्युकी उनके सास लेने की नाली में छेड़ करना पड़ा था ।

जब स्टेफेन के मित्र मार्टिन किंग को मालूम पड़ा तो उन्होंने अपनी जान पहचान में एक कंपनी थी word plus जो की equalizer नाम का एक सॉफ्टवेयर बनाती थी जो स्टेफेन जैसे मरीजों को बोलने में मदद करती थी, से संपर्क किया । word plus ने एक मशीन बनाया स्टेफेन के लिए जिसपे स्टेफेन अंगूठे से टाइप करते थे और वो मशीन उसको आवाज देती थी उसी आवाज को लोग स्टेफेन की आवाज के तौर पर सुना।

2008 तक स्टेफेन का अंगूठे ने भी काम करना बंद कर दिया तो उनकी assistant ने चीक स्विच नाम के एक मशीन का इजात किया जिसमे उनके गाल को उनके चश्मे के साथ जोड़ा गया । स्टेफेन अपने गाल को हल्का हल्का हिलाते थे और उनके चश्मे से जुड़ा हुवा सेंसर उसको एक कंप्यूटर में भेजता था और वो कंप्यूटर उस हिसाब से शब्द बना के उसको आवाज देता था ।

2011 में स्टेफेन को अपना गाल हिलने में भी दिकत आने लगी तो उन्होंने इंटेल से संपर्क किया की जिसके बाद इंटेल ने हमेसा कुछ न कुछ नया प्यास कर के बोलने में उनकी मदद करता रहा, इनमे से एक प्रयास यह था की स्टेफेन को बोला गया क आप जितना बोल सकते हो बोलो और फिर मशीन ये निर्णय लेती थी के स्टेफेन का कहना चाह रहे है उसके बाद से वाक्यों को आवाज दी जाती थी ।

जब 1985 में स्टेफेन को मशीन दी गयी बोलने के लिए तो उस टाइम काफी जम्भीर होती थी ये और उनके व्हील चेयर पर नहीं आ पाती थी फिर एक इंजीनियर थे जिनका नाम डेविड मेसन नाम के उन्होंने किसी तरह सुधार कर के स्टेफेन के व्हील चेयर पे सेट किया ।

डेविड की पत्नी एलेन मेसन स्टेफेन की नर्स हुवा करती थी । दोनों में धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ी और दोनों ने शादी कर ली । बाद में दोनों का तलाक हो गया ।

स्टेफेन ने ऑक्सफ़ोर्ड में एक कार्यक्रम में 1 घंटे लम्बा भाषण दिया जिसको पूरी दुनिया ने काफी गौर से सुना उस भाषण में उन्होंने कहा की उन्हें ऐसा नहीं लगता की इंसान इस धरती पर 1000 साल से ज्यादा जी पायेगा क्युकी जलवायु में लगातार परिवर्तन हो रहा है । बहुत सालो से कोई उल्का पिंड धरती से आकर नहीं टकराया जो की आने वाले सालो में हो सकता है । बहुत सारे राजनितिक परिवर्तन भी हो रहा है, परमाणु युद्ध का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, कभी भी ऐसा हो सकता है की कोई भी कही से भी परमाणु हमला कर सकता है । आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस की तरक्की लगातार हो रही है हाकिंग का ये कहना था की एक बार आर्टिफीसियल इंटेलीजेंस पूरी तरह से लागु हो जाये फिर ये पूरी दुनिया को अपने कण्ट्रोल में ले लेगा और पूरी मानवता का अंत हो जायेगा । स्टेफेन का मानना था की आने वाले 600 में ये हो कर रहेगा और धरती आग का गोला हो जाएगी फिर मानव धरती पे रह नहीं पायेगा । स्टेफेन धरती हो प्लेनेट बी कहते थे वो कहते थे की मानव को अपने लिए एक alternate ढूंढ लेना चाहिए जहा में मानव का गुजारा हो सके ।