जाने क्या है श्रीलंका इमरजेंसी ।

3 months ago Newspadho 0

6 मार्च 2018 को श्रीलंका में इमरजेंसी लगा दी गयी है ।बौद्ध समुदाय और मुस्लिम समुदाय के बिच में तनाव है। श्री लंका में बौद्ध सम्प्रदाय और मुस्लिम सम्प्रदाय के बिच में दंगे हुए। यह दंगे धीरे धीरे भयावह रूप ले रहे थे।कई लोगो की जाने जा रही थी और कितने ही लोग घायल हो गए थे। मामला पुलिस की पहुंच से बहार होता जा रहा था जिसकी वजह से श्रीलंका की सर्कार को वह इमरजेंसी लगानी पड़ी ।फ़िलहाल यह इमरजेंसी 10 दिनों के लिए लगायी गयी है। यह इसलिए करना पड़ा ताकि ये दंगे कही म्यांमार की तरह भीसड़ रूप न ले ले ।

जाने कहा हुए दंगे ।

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ये दंगे श्रीलंका के बीचो बिच बसे शहर कैंडी में हुए। दिखाई गयी तस्वीर कैंडी शहर की है जहा बौद्ध धर्म में कुछ लोग और मुस्लिम धर्म के कुछ लोगो की आपस में लड़ाई हो गयी । चुकि बौद्ध धर्म के लोगो की संख्या ज्यादे थी अतः मुस्लिम समुदाय के लोगो को काफी नुक़साम हुवा। सैकड़ो मस्जिदे तोड़ दी गयी और मुस्लिमो के घरो पे हमला किया गया।विभिन सुकतरो से पता चलता है की काफी बड़ी मात्रा में मुसलमानो को नुकसान पहुंचाया गया है ।हालांकि इमरजेंसी लगाने के बाद हालत पे काबू पा लिया गया है। सड़को पे भीड़ काम है क्युकी कर्फ्यू लगा दिया गया है। पैरामिलिट्री फ़ोर्स और पुलिस फ़ोर्स को काफी ताकत प्रदान की गयी है यहाँ तक की अब वो किसी को भी गिरफ्तार कर सकते है। जिसकी वजह से लोगो के मन में सरकार का भय है। इमरजेंसी लगाने के बावजूद श्रीलंका की सरकार का काफी आलोचना की जरा रही है। इसका कारण यह है की सरकार ने इमरजेंसी लगाने में देर की। अगर सरकार ने पहले कदम उठाया होता तो शायद काफी लोगो की जाने बचायी जा सकती थी।

क्या था कारण ?

श्रीलंका के दंगे काफी हद तक म्यांमार के दंगो से मिलता जुलता है।म्यांमार में एक घटना घटी जिसमे एक लड़की का रपे रोहिंग्या मुसलमानो ने किया और उसे मर दिया जिसके बाद वह के जो बहुसंख्यक समुदाय के लोग है उनमे आक्रोश उत्पन्न हुआ। जिसके बाद दोनों समुदायों के बिच लड़ाई शुरू हो गयी धीरे धीरे ये लड़ाई दंगो का रूप लेती गयी जिसके बाद रोहिंग्या मुसलमानो को वहां से भगा दिया गया। जिसके बाद म्यांमार की पूरी दुनिया में आलोचना की गयी । श्रीलंका में भी काफी हद तक स्थिति उसी तरह की थी जैसा की म्यांमार में हुआ । एक 41 साल के सिंहली समुदाय के एक व्यक्ति जो सड़क पे ट्रक चला रहे थे । एक टक्कर के बाद लड़ाई होती है सड़क पे ही जो की सभी देशो में सामान्यतः होती ही है । यह लड़ाई धीरे धीरे बढ़ जाती है और उस व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या कर दी जाती है । कैंडी शहर में अफवाह मच जाती है के ऐसा मुस्लिम समुदाय के लोगो ने किया है । जिसके पीछे उनकी मंशा ख़राब थी ।अचानक से दोनों समुदाय के लोग आ जाते है लड़ाई शुरू हो जाती है और वह दंगे में तब्दील हो जाती है ।जिसकी वजह से सरकार को इमरजेंसी लगानी पड़ी । ताकि जो म्यांमार में हुआ वो श्रीलंका में न हो ।

भारीतय उपमहाद्वीप में यह प्रचलन चल पड़ा है जहा पे जो छोटे देश है उन्हें इमरजेंसी लगानी पद रही है । इस पुरे उपमहाद्वीप में अस्थिरता बढ़ रही है । ऐसा नहीं है कि श्रीलंका में यह पहला दंगा है । इस से पहले भी वहां पे दंगो का काफी बड़ा इतिहास रहा है बुद्धिस्ट और मुस्लिम समुदाय के बिच में । 2014 में भी दोनों समुदायों के बिच में दंगे हो चुके है ।इसका कारण क्या है क्युकी मुस्लिम समुदाय के लोगो का कहना होता है के उनको बिना वजह निशाना बनाया जा रहा है । जैसा कि वो हमेसा से कहते आये है । मगर जो बौद्ध समुदाय है उनके अनुसार मुस्लमान अपना विस्तार बहुत तेज़ी से कर रहे है ।लोगो का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और जो बौद्धिक धार्मिक स्थल है उनको नुकसान पहुंचाया जा रहा है । यह मुख्या कारण है । श्रीलंका में 75 फीसदी बौद्ध धर्म के लोग है और 10 फीसदी मुस्लमान है ।गौरतलब है कि मुस्लिम आबादी बहुत तेज़ी से 6 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गयी है ।बौद्ध धर्म के लोग यह नहीं चाहते कि हम अपने ही देश में अल्पसंख्यक बन जाये इसलिए वो रक्षात्मक शैली अपना रहे है ।

15 जून 2014 को जो दंगे हुवे उसमे 4 लोगो कि मृत्यु हुई 80 लोग घायल हुवे और उसमे एक गट का नाम सामने आया जो कि एक बौद्धिष्ट गट था जिसका नाम बोदु बाला सेना था । इस दंगे में भी इसी गट का नाम सामने आ रहा है । ये मुख्यतः उन लोगो का ग्रुप है जो बौद्ध है और ये मानते है कि अपनी बात सामने रखने के लिए हिंसा का सहारा भी लेना चाहिए । इसमें मुख्य बात यह है कि सरकार भी बोदु बाला सेना के खिलाफ कोई कार्यवाही करने को त्यार नहीं है ।

क्या है बोदु बाला सेना ?

बोदु बाला सेना एक बौद्धिष्ट नेशनलिस्ट ग्रुप में जो कोलंबो में स्थित है । इनकी मान्यता है कि श्रीलंका कि जो पहचान है वो बुद्धिज़्म और सिंहली है । ये लिबरल के खिलाफ है और बाहरी ताकतों के खिलाफ है और सेकुलरिज्म के भी खिलाफ है । हालांकि इस हूत कि काफी आलोचना कि गयी पूरी दुनिया में ।

 

श्रीलंका में इमरजेंसी का इतिहास काफी पुराण रहा है आखिरी बार 2011 में इमरजेंसी लगी थी उस से पहले भी LTTE के खिलाफ जो लड़ाई थी श्रीलंका कि सरकार कि उसमे भी कई बार एमरजेंगी लगायी गयी । उस समय भी काफी लोग मारे गए, काफी नुसकान हुआ जिसकी वजह से वहां कि सरकार ज्यादे संवेदनशील है इन सब मामलो को लेकर । क्युकी LTTE कि वजह से सरकार को काफी जान मालका नुकसान हुआ । इसलिए फिर से इमरजेंसी लगानी पड़ी ।

बौद्ध क्यों हो रहे है आक्रामक ?

म्यांमार में भी ऐसा देखा गया कि बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग आक्रामक होते जा रहे है । म्यांमार में बौद्धों ने रोहिंग्या मुसलमानो को मारा, कम्बोडिया में भी बौद्ध नॅशनलिस्ट्स आक्रामक हो गए । गौतम बुद्ध ने इस चीज़ से दूर रहने को सिखाया है बौद्ध धर्म में यहाँ तक कि जब खुद को बचाना हो तब को हिंसा का सहारा तब ले जब आपके पास और कोई उपाय न बचा हो । सोचने वाली बात यह भी है कि जिन देशो में बौद्ध धर्म को मानने वाले ज्यादा है वहां पर वही पर ऐसा हो रहा है उदहारण के तौर पर श्रीलंका में 70 %, 88 % म्यांमार में 93 % थाईलैंड में । मगर फिर भी अल्पसंख्यकों को लेकर उनके मन में डर है कि कही इनकी वजह से हमारी आबादी कम ना हो जाये ।

अल्पसंख़्यको का डर

यह संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में भी देखने को मिला । डोनाल्ड ट्रम्प ने काफी बार अपने चुनावी भाषणों में कहा के हम मुसलमानो को वापस भेजना चाहते है और वो काफी हद तक चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र क्रिश्चियन्स का रहे । अल्पसंख्यकों का डर खली श्रीलंका, संयुक्तराष्ट्र और म्यांमार में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी देखने को मिलता है जहा पर अहमदिया समुदाय के लोगो को निशाना बनाया जाता है । अहमदिया समुदाय पाकिस्तान में अल्पसंख्यक है 1 %से भी कम है । चुनावी भाषणों में अहमदिया समुदाय को काफी निशाना बनाया जाता है सुन्नी मुस्लिमो के तुस्टीकरण से लिए अहमदिया समुदाय को टारगेट किया जाता है । हालांकि पाकिस्तान का संविधान भी अहमदिया समुदाय को मुस्लिम नहीं मानता है । और उनको धार्मिक हक़ नहीं प्रदान किया जाता है । लगातार अहमदिया समुदाय के खिलाफ दंगे भी हो चुके है पाकिस्तान में 1954 ,1974 और 2010 में अहमदिया समुदाय के लोगो कि जो मस्जिदे है उन्हें भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाया गया ।

 

भारतीय क्रिकेट टीम इस समय श्रीलंका में मुजूद है लेकिन सरकार कि तरफ से पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया गया है । अगर कूटनीतिक तरीके से देखा जाये तो श्रीलंका भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण देश है और श्रीलंका के साथ भारत के रिश्ते भी काफी अच्छे है और भारत कभी भी यह नहीं चाहेगा कि जो म्यांमार में हुआ वो श्री लंका में हो । अगर ऐसा होता है तो पहली बात भारत में म्यांमार से निष्काषित रोहिंग्या आकर बस रहे है उसके बाद श्रीलंका से भी निष्काषित होकर मुस्लमान आएंगे जिनसे भारत का भूगोल ख़राब होने का खतरा बढ़ता जायेगा । अतः भारत चाहेंगा कि इस स्थिति से अच्छे से निपटे श्रीलंका ।